आर्थिक सुधारों पर महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन!

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जीवन के साथ-साथ आजीविका भी महत्वपूर्ण है। कोरोना से प्रभावित दुनिया में आर्थिक सुधार के कारकों पर विचार-विमर्श करने के लिए महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजेमेंट स्टडीज़ (मेम्स) ने अपने अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक साझेदारों “थम्मासैट विश्वविद्यालय, थाईलैंड” और “वॉलजट कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज, ओमान” के साथ छठे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “ड्राइवर्स ऑफ ग्लोबल इकोनोमिक रिकवरी” का आयोजन किया। सम्मेलन के 15 तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के 200 से अधिक प्रतिभागियों ने 100 से अधिक  शोध पत्र प्रस्तुत किए।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. मिया मिकिक, सलाहकार, आर्टनेट, बीकेके, थाईलैंड ने कोरोना से उपजे मौजूदा संकट की भयावहता का जिक्र करते हुये महामारी के दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों की चर्चा की।  मुख्य अतिथि, भारत में श्रीलंका के उप उच्चायुक्त निलुका कदुरुगामुवा ने श्रीलंका सरकार  द्वारा आर्थिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी | डॉ. नंदकिशोर गर्ग, संस्थापक और मुख्य सलाहकार, मेट्स, और चांसलर, महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश, ने एक सकारात्मक मानसिकता के साथ महामारी का मुकाबला करने पर जोर दिया और इसे अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के लिए एकमात्र रास्ता बताया। प्रो. (डॉ.) एस. एल. गुप्ता, डीन, वॉलजट कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज, ओमान ने आर्थिक सुधारों के लिए अपनी 11 सूत्री रणनीति साझा की, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए ऑटोमेशन और बिजनेस के उद्देश्यों को पुन: परिभाषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. (डॉ.) एस के गर्ग, महानिदेशक, मेम्स ने सम्मेलन के सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन का परिणाम नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट साबित होगा। प्रो. (डॉ.) रवि कुमार गुप्ता, निदेशक, मेम्स, ने स्वागत भाषण में सबका अभिवादन किया।

प्रतिष्ठित पैनलिस्ट ने मौजूदा परिदृश्य में ग्लोबल इकोनॉमी के ड्राइवर्स पर विचार किया। डॉ. बद्री नारायणन गोपालकृष्णन, सह-संस्थापक, इनफाइनाइट सम मॉडलिंग इनफिसम, अमेरिका, ने विश्व अर्थव्यवस्था की रिकवरी में डिजीटल टेक्नोलॉजी के योगदान पर चर्चा की। डॉ. जुथपति जोंगवानिच, एसोसिएट प्रोफेसर, थम्मासैट विश्वविद्यालय और संपादक, थाईलैंड और विश्व अर्थव्यवस्था, ने सरकार द्वारा दिये जाने वाले आर्थिक प्रोत्साहनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। प्रो. फैसल अहमद, एसोसिएट प्रोफेसर और एरिया चेयर, इंटरनेशनल बिजनेस, फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने महामारी के दौर में वैश्विक शक्तियों के बदलते समीकरण और इसके भू-राजनीतिक निहितार्थ के बारे में बात की। डॉ. संजय कुमार मंगला, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख, अर्थशास्त्र विभाग, मेम्स ने अनौपचारिक क्षेत्र के पुनरुद्धार के बारे में बात की क्योंकि यह किसी भी विकासशील राष्ट्र में अधिकतम रोजगार प्रदान करने का माध्यम है। पैनल चर्चा का संचालन डॉ अंजलि टंडन, एसोसिएट प्रोफेसर, इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज़ इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, दिल्ली ने किया।

समापन सत्र में बोलते हुए, गेस्ट ऑफ ऑनर, इंडोनेशिया से आसियान और पूर्वी एशिया के लिए आर्थिक अनुसंधान संस्थान (ईआरआईए) के वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. लुरंग चेन ने वैश्विक स्तर पर डिलीवरी चेन में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के निदेशक श्री प्रवीण कुमार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में शीघ्र सुधार की आशा व्यक्त की। डॉ. संजय कुमार मंगला ने सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की और धन्यवाद ज्ञापन प्रो (डॉ) विजय कुमार खुराना, एचओडी-बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, मेम्स ने किया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर काम करने के संकल्प के साथ किया गया ताकि विश्वस्तरीय आर्थिक समस्याओं का सम्मिलित रुप से समाधान निकाला जा सके।

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