‘The yogic way of life’ एक युवा योगिनी का आम पाठकों से सीधा संवाद।

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अगर आप में योग सीखने की ज़रा सी भी ख्वाहिश है तो नेहुल मिश्र की ये किताब आपके लिए ही है। दरअसल ये किताब योगिनी नेहुल मिश्र की तरफ से समाज के लिए बेशकीमती तोहफा है। सबसे पहले तो आपके नेहुल मिश्र के बारे में जानकारी देते हैं उसके बाद आपको बतायेंगे कि ये किताब आपके लिए उपयोगी क्यों है।                                                                                    

बात बहुत पुरानी तो नहीं कही जा सकती क्योंकि उस वक्त को गुजरे मात्र ग्यारह साल ही हुए हैं लेकिन इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के आखिरी वर्षों में यानि 2009-10 में डीपीएस इंदिरापुरम गाजियाबाद में पांचवी कलास में पढ रही छोटी सी बच्ची योग की दुनिया में ना केवल दिलचस्पी ले रही थी बल्कि इंटर हाउस योग प्रतियोगिता में अव्वल स्थान प्राप्त कर अपने कौशल से सबको हैरान भी कर रही थी। जी हां यही वो बच्ची है जिसे आज दुनिया योगिनी नेहुल मिश्र नाम से जानती है। बचपन से योग को साधना शुरू किया और पढ़ाई के साथ साथ योग की दुनिया में नाम रोशन करने लगी। फिर चाहे जिला स्तरीय प्रतियोगिता हो या स्टेट लेवल चैम्पियनशिप सबको पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ती गई। 2016 में भारतीय योग संघ द्वारा आयोजित नेशनल कंप्टीशन में प्रथम स्थान हासिल करके नेहुल ने ये साबित कर दिया कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती तब इनकी उम्र मात्र 15 साल थी। उसके बाद नेहुल ने तय कर लिया कि योग को ही करियर में बनाना है। पढ़ाई के साथ साथ योग की शिक्षा को जारी रखा । हालांकि मुश्किल होता है तब जबकि स्कूल की दसवीं बारहवीं की पढ़ाई करते हुए योग की बारीकियों को उतनी ही संजीदगी से जीना। वर्तमान में नेहुल मिश्र एक प्रशिक्षित योग शिक्षिका हैं और साथ ही SHOOLINI UNIVERSITY, हिमाचल से Bsc Yoga कर रही हैं। योग से जुड़ी एक कंपनी में नेहुल Yog consultant के रूप में कार्यरत भी हैं।

मौजूदा दौर में जब पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से जूझ रही है और लोग सेहत के प्रति बेहद संवेदनशील हो चुके हैं ऐसे में The yogic way of life किताब कई मायनों में उपयोगी है। ये पुस्तक हमारे आसपास के लोगों द्वारा आम रोग के निदान से संबंधित है। ये योग को अपनी जीवनशैली बनाने और रोग से बचाव के प्रबंधन पर जोर देती है। किताब में मधुमेह,उच्च रक्त चाप,थायराइड,हाइपरटेंशन,हृदय की समस्या और अस्थमा से बचाव के तरीके पर आधारित विषयों को बेहद आसान और स्पष्ट निर्देशों के साथ समझाया गया है। आम पाठकों को समझने में या उसे अपनाने में दिक्कत ना हो इसके लिए संबंधित रोग से बचाव के लिए चित्र भी दिये गए हैं। किस आसन के करने से क्या लाभ निश्चित है उसको भी विशेष तौर पर बताया गया है। बीमारी किसी भी उम्र में और किसी व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले सकती है इसलिए बिना किसी सीमा और बंदिश के आसान तरीके से आसन के बारे में बताया गया है। युवा लेखिका योगिनी नेहुल का मानना है कि हम एक ऐसी बीमारी से झूझ रहे हैं जहां हम हर संभव अपनी सीमा में रहते हुए और नियमित आसन करके उसपर जीत हासिल कर सकते हैं। हालांकि इस धारणा को कि एक निश्चित समय में ही आसन करना उचित होगा इसे लेखिका ने सिरे से खारिज किया है। भागदौड़ की जिंदगी में सुविधानुसार आप अपना समय निकालकर आसन करें लाभ होना तय है।

यह एक मार्गदर्शिका पुस्तक है जिसमें गागर में सागर भरने की कोशिश की गई है।आपके शरीर के अंदर ही रोगमुक्त होने के लिए औषधि उपलब्ध है बशर्ते आप सही तरीके से उसकी देखभाल करें। पुस्तक में वर्णित अधिकाश आसन आपके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले हैं। वर्तमान में चल रही महामारी की स्थिति में ये और प्रासंगिक हो जाते हैं। हमारे अंदर की प्रतिरक्षा प्रणाली बाहरी घातक वायरस से बचाने में बेहद मददगार होती है।सूर्य नमस्कार, पश्चिमोतनासन, त्रिकोणासन, प्राणायाम और कपालभाती जैसे अभ्यास इस पुस्तक में सरल तरीके से वर्णित किये गए हैं। एक युवा योगिनी लेखक ने सच में आम पाठकों से संवाद स्थापित करने की सफल कोशिश की है जिससे की समाज को सच में शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिल सके।  नेहुल मिश्र को मीडिया अड्डा की ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

2 COMMENTS

  1. बहुत शानदार जानकारी , धन्यवाद , साधुवाद एवं अनंत शुभकामनाएं |

  2. यह तो हम मीडिया वालों के लिए बड़ी ही गर्व की बात है बिटिया को बहुत बधाइयां और उनके माता-पिता को भी

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